इस दिल की भावना कोई ना समझ पाया
कि आते आते ये दर्द आँखों में भर आया
इस दर्द को पोंछने में भी एक टीसें सी उठी
बह जाने दो मुझे एक बार कहीं ये आवाज उठी
आज फिर उसे रोकने में हाथ कंपकंपाया है
इस दर्दनाक आवाज को फिर दिल की गहराईयों में दबाया है
कभी पुकारे वो आवाज दुबारा
गूँजेगा यही सवाल बार बार हमारा
सवाल ये है कि इस तरह कब तक बचेंगें इस दर्द से
दुनिया को छोड़ क्यूँ ना निकाल दें इस दर्द को मन से
और बह जाने दें इन्हें बनकर दरिया
दुनिया है ही तो भावनाएँ जताने का जरिया.
– गरिमा तिवारी
achchi kavita….bhaawnaayen spasht jhalak rahi hai !
अच्छी कविता…भावना तो झलक रही है !!
बहुत सुन्दर लिखा है…दबी भावनाओं की सुन्दर अभिवयक्ति है॥ बधाई
दर्द अच्छे होते हैं
wah ! ati sundar !
accha hai ki dard ko hatho se nikala jaye.
duniya me har ek aadmi ise jan to sake
kya bat hai bahut sundra kavita likhi hai