हो जाऊँ कभी मैं तेज (बिजली) सा
सूरज की तेज किरण सा
घुमु मैं कहीं भी
हो घर मेरा मधुवन सा
राज करू जहां पर मैं
कहलाऊँ मैं भगवन सा
जो चाहू वो मिल जाए
वो … जाए वो जी जाए
झूमु कभी मैं सावन सा
कभी सोचता हूँ दोडू भागु
कस्तूरी के लिए जैसे
वन में कोई हिरन सा
कभी कहीं खो जाऊँ मैं
आसमा के तारो [...]
Archive for March, 2008
मेरा मन
Posted in कविता, गौरव on March 27, 2008 | Leave a Comment »
व्यर्थ
Posted in कविता, राजीव on March 27, 2008 | Leave a Comment »
व्यर्थ जगत,
व्यर्थ जीवन ,
व्यर्थ मेरी आत्मा |
व्यर्थ है सब िमथ्या,
व्यर्थ है सब सत्य |
व्यर्थ है ये नभ,
व्यर्थ ही आिदत्य ||
व्यर्थ सारा ज्ञान है ,
व्यर्थ ही अिभमान है |||
व्यर्थ थी ये मोह-माया ,
व्यर्थता अब भी िवध्य्मान है ||||
व्यर्थ जगत ,
व्यर्थ जीवन,
व्यर्थ मेरी आत्मा |
व्यर्थ मेरा आज है,
व्यर्थ मेरा कल होगा |
व्यर्थ मेरी राख है ,
व्यर्थ मेरा [...]
एक ख्वाब
Posted in कविता, बिरजू on March 27, 2008 | 3 Comments »
हर बंधन से दूर , अनजान शहर में
रूह की गहराई से , मेरे जीवन में
आता है कोई , जाता है कोई
देखता हू सब कुछ … एक ख्वाब की तरह …
हवाओ के झोको में, अजीब सी ठंडक है
रातो के उजाले में भी एक दीवानापन है
समंदर की लहरे जैसे लीपटी हो बर्फ की चादर में
जीवन की कसक [...]
आजाद
Posted in कविता, गौरव on March 27, 2008 | Leave a Comment »
हम आजाद होते तो
यह देश इक नगमा होता
संगीत झरने पशु पक्षी देते
गायक भारत जन होता
बारिश होती न कहीं बाढ़ आती
जब पानी भी आजाद होता
न घर इतने तबाह होते
न कोई घरौंदा बर्बाद होता
घर कोई टूटता भी तो
मदद सभी करते
न किसी की जाती जान
न कोई भूखा रहा होता
व्यवस्था भी इतनी होती
अगली सुबह स्वागत के लिए
नया घर तैयार [...]
मुझको ऐ जान मेरी इतनी इजाजत दे दो
Posted in कविता, मनीष सौरभ on March 21, 2008 | Leave a Comment »
अपने अश्को से आज तेरा दामन भीगा दूँ
मुझको ऐ जान मेरी इतनी इजाज़त दे दो
ना जाने किन जमानो से मैं सोया नही हूँ
अपने आँचल में छिपा लो , मुझको सुला दो
मैं अपनी तक़दीर से लड़ता अकेला थक गया हूँ
साथ मेरे आ के मुझको अब सहारा दे दो
न जाने कितनी सादियो से मैं रोया नही हूँ
ये [...]