अपने बीमार को ये कैसी सजा देते हैं ?
वो जब भी आते हैं, दर्द और बढा देते हैं !!
सुना है उसने छुपा रक्खी है बड़ी हुश्न की दौलत,
फ़कीर आये उनके दर पे, देखे तोः क्या देते हैं !!
बचेगा कैसे भला कोई उनकी निगाह-ए-नश्तर से,
संभलने भी नहीं देते और तीर चला देते हैं !!
दर्द-आशनाई का क्या [...]
Archive for August, 2008
ग़ज़ल
Posted in ग़ज़ल, रविरंजन कुमार on August 31, 2008 | 4 Comments »
ओ रे नीरे !
Posted in आशीष पालीवाल, tagged kavita on August 21, 2008 | 1 Comment »
ओ रे नीरे !
आज मचल जा कि
अब अंतस में तेरे
भाव की लहरें उठेंगी
स्वप्न के संचार होंगे
और इस नीरस धरा पर
पुष्प हर रंग का खिलेगा
ना थी मूरत
था सनाटा
आज बज जाए मंजीरे
ओ रे नीरे !
स्वप्न की दुनिया का
सच में
आज मन
संचार होगा
आज सोयेगा अँधेरा
प्रेम का उजियार होगा
आज सूखे जलधरो से
भी यहाँ पानी गिरेगा
झूम तू खुशियों में लेकिन
थोडा धीरे
ओ [...]
ताजमहल बनाते कर्मचारियों के बीच का वार्तालाप
Posted in आलोक कुमार, आशीष पालीवाल, प्रतियोगिता on August 16, 2008 | 26 Comments »
संत जेवियर मुंबई के सालाना जलसे मल्हार की हिंदी प्रतियोगिता में आई.आई.टी. की टीम प्रथम आयी. याद के तौर पर मैं उसे वाणी पर डाल रहा हूँ. आप पढ़कर ये भी अनुमान लगा सकते हैं कि छात्रों के बीच की प्रतियोगिता का स्तर क्या होता है .
विषय: आगरा, ताजमहल बनाते कर्मचारियों के बीच का वार्तालाप
समय [...]
परमाणु संधि का मतलब ये है कि ….
Posted in ध्रुव सोनी, प्रतियोगिता, लेख on August 2, 2008 | 1 Comment »
कल हमने एक रचनात्मक लेखन प्रतियोगिता रखी थी, जिसमें एक अनपढ़ नेता रामप्रसाद जी को परमाणु करार के बारे में बताना था और उनसे विश्वास मत हासिल करना था ,प्रथम वर्ष के छात्र ध्रुव सोनी का लेख कुछ इस तरह का है . परमाणु संधि का मतलब ये है कि…
सोनिया गांधी ,अपनी पूरी नेता मंडली [...]