मै छोड चुका
तो छोड चुका
प्रिये प्रेम के इस पथ पर
हमको चलना था साथ मगर
हो साथ तेरा हो साथ मेरा
ये राहे साथ नही देती
तन्हा राहो से दर्द भरा
संबंध निभाने से अच्छा
मै तोड चुका
तो तोड चुका
जैसे-जैसे सांसे घटती
ये राहे बंटती जाती है
नाकाम मेरी नज़रे होती
दूरी यूं बढती जाती है
अब किसे याद कि
कभी तुम्हारा
हाथ भी थामा था हमने
वादो के शव पर आस बहा
मुंह मोड चुका
तो मोड चुका
वादो के शव पर आस बहा
मुंह मोड चुका
तो मोड चुका
अच्छी रचना है….
बहुत सुन्दर.
बहुत सुन्दर
—आपका हार्दिक स्वागत है
गुलाबी कोंपलें
good one
अब किसे याद कि
कभी तुम्हारा
हाथ भी थामा था हमने
वादो के शव पर आस बहा
मुंह मोड चुका
तो मोड चुका
“भावनाओ को और मजबूरी को स्पर्श करते शब्द..”
Regards