मै छोड चुका तो छोड चुका प्रिये प्रेम के इस पथ पर हमको चलना था साथ मगर हो साथ तेरा हो साथ मेरा ये राहे साथ नही देती तन्हा राहो से दर्द भरा संबंध निभाने से अच्छा मै तोड चुका तो तोड चुका जैसे-जैसे सांसे घटती ये राहे बंटती जाती है नाकाम मेरी नज़रे होती [...]
Archive for the ‘आशीष पालीवाल’ Category
मै छोड चुका
Posted in आशीष पालीवाल, कविता on जनवरी 22, 2009 | 5 Comments »
ओ रे नीरे !
Posted in आशीष पालीवाल, tagged kavita on अगस्त 21, 2008 | 1 Comment »
ओ रे नीरे ! आज मचल जा कि अब अंतस में तेरे भाव की लहरें उठेंगी स्वप्न के संचार होंगे और इस नीरस धरा पर पुष्प हर रंग का खिलेगा ना थी मूरत था सनाटा आज बज जाए मंजीरे ओ रे नीरे ! स्वप्न की दुनिया का सच में आज मन संचार होगा आज सोयेगा [...]
ताजमहल बनाते कर्मचारियों के बीच का वार्तालाप
Posted in आलोक कुमार, आशीष पालीवाल, प्रतियोगिता on अगस्त 16, 2008 | 30 Comments »
संत जेवियर मुंबई के सालाना जलसे मल्हार की हिंदी प्रतियोगिता में आई.आई.टी. की टीम प्रथम आयी. याद के तौर पर मैं उसे वाणी पर डाल रहा हूँ. आप पढ़कर ये भी अनुमान लगा सकते हैं कि छात्रों के बीच की प्रतियोगिता का स्तर क्या होता है . विषय: आगरा, ताजमहल बनाते कर्मचारियों के बीच का [...]
तेरी याद
Posted in आशीष पालीवाल, कविता on जुलाई 17, 2008 | 1 Comment »
रातो को मैं सपने तेरे बुनता हूँ मन ही मन मैं यादे तेरी गुनता हूँ रातो को मैं सपने तेरे बुनता हूँ ……. तेरी यादे तेरी बातें मन के अपने प्यारे नाते हर साँस मे तेरा नाम बसा मैं ख़ुद की धड़कन सुनता हूँ रातो को मैं सपने तेरे बुनता हूँ….. बैठ मैं तारे गिनता [...]
मैं मूक कवि
Posted in आशीष पालीवाल on नवम्बर 13, 2007 | Leave a Comment »
मैं मूक कवि हूँ ,मूक कवि मैं कह नही सकता भावो को इसलिये उकेरता रहता हूँ कागज़ पर डगमग नावों को || मैं सुन सकता हूँ ,सुनता हूँ तरह-तरह की बातो को कितने पंछी के कलरव को आंधी मे डालो-पातो को|| चुपचाप मैं बस सुनता रहता जो जगती मुझको सुनाती है कभी,वीणा की मधुर तान [...]
मित्रता
Posted in आशीष पालीवाल, कविता on अक्टूबर 12, 2007 | 6 Comments »
धूप में किसी पेड की छाया को कहते मित्रता, ईश के हाथो बनी काया को कहते मित्रता || ग़र निराशा आ भी जाए मित्रता अवलम्ब है बोझ ले विश्वास पर यह वह अटल स्तम्भ है || स्वार्थ को जाने नही वह भावना है मित्रता मित्र के हर स्वप्न की एक कामना है मित्रता || मरीचिका [...]