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Archive for the ‘आशीष पालीवाल’ Category

मै छोड चुका तो छोड चुका प्रिये प्रेम के इस पथ पर हमको चलना था साथ मगर हो साथ तेरा हो साथ मेरा ये राहे साथ नही देती तन्हा राहो से दर्द भरा संबंध निभाने से अच्छा मै तोड चुका तो तोड चुका जैसे-जैसे सांसे घटती ये राहे बंटती जाती है नाकाम मेरी नज़रे होती [...]

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ओ रे नीरे !

ओ रे नीरे ! आज मचल जा कि अब अंतस में तेरे भाव की लहरें उठेंगी स्वप्न के संचार होंगे और इस नीरस धरा पर पुष्प हर रंग का खिलेगा ना थी मूरत था सनाटा आज बज जाए मंजीरे ओ रे नीरे ! स्वप्न की दुनिया का सच में आज मन संचार होगा आज सोयेगा [...]

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संत जेवियर मुंबई के सालाना जलसे मल्हार की हिंदी प्रतियोगिता में आई.आई.टी. की टीम प्रथम आयी. याद के तौर पर मैं उसे वाणी पर डाल रहा हूँ. आप पढ़कर ये भी अनुमान लगा सकते हैं कि छात्रों के बीच की प्रतियोगिता का स्तर क्या होता है . विषय: आगरा, ताजमहल बनाते कर्मचारियों के बीच का [...]

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रातो को मैं सपने तेरे बुनता हूँ मन ही मन मैं यादे तेरी गुनता हूँ रातो को मैं सपने तेरे बुनता हूँ ……. तेरी यादे तेरी बातें मन के अपने प्यारे नाते हर साँस मे तेरा नाम बसा मैं ख़ुद की धड़कन सुनता हूँ रातो को मैं सपने तेरे बुनता हूँ….. बैठ मैं तारे गिनता [...]

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मैं मूक कवि हूँ ,मूक कवि मैं कह नही सकता भावो को इसलिये उकेरता रहता हूँ कागज़ पर डगमग नावों को || मैं सुन सकता हूँ ,सुनता हूँ तरह-तरह की बातो को कितने पंछी के कलरव को आंधी मे डालो-पातो को|| चुपचाप मैं बस सुनता रहता जो जगती मुझको सुनाती है कभी,वीणा की मधुर तान [...]

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धूप में किसी पेड की छाया को कहते मित्रता, ईश के हाथो बनी काया को कहते मित्रता || ग़र निराशा आ भी जाए मित्रता अवलम्ब है बोझ ले विश्वास पर यह वह अटल स्तम्भ है || स्वार्थ को जाने नही वह भावना है मित्रता मित्र के हर स्वप्न की एक कामना है मित्रता || मरीचिका [...]

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