क्या है सघन मेघों के उस पार, नही जानता । हो सकता है अंधकार , या हो सकते हैं सूर्य हजार, यही मानता । सत्य छुपा हो उस चोटी पर, जो हो मेघों से भी ऊपर । बादल से छनती किरण थाम लूँ , उस चोटी को लक्ष्य मान लूँ । विकट सरल बाधाएं चीर [...]
Archive for the ‘ऋषभ जैन’ Category
अनंत
Posted in ऋषभ जैन, कविता on अगस्त 17, 2009 | 2 Comments »
कवि तो ख़ुद एक कविता है
Posted in ऋषभ जैन, कविता on अगस्त 6, 2009 | 1 Comment »
उसमें अनंत गहराई है, है व्याकुलता, तन्हाई है, ढूंढ सको तो ढूंढ लो , एक ‘सोता‘उसमें कहीं बहता है- कवि तो ख़ुद एक कविता है । दुनिया से बेगाना है, दुनियादारी से अनजाना है, अव्यक्त, उलझे भावों को, वो कागज़ पर लिख देता है- कवि तो ख़ुद एक कविता है । शब्दों की भी सीमायें [...]