कुछ चीजें होती है, जिनका अनजाने में ही इंतज़ार किया करते है, कोई खामोशी से तो कोई ख़ुशी से, अपना इज़हार किया करते है… कुदरत की इस कृति की बड़ी अजीबोगरीब दास्ताँ है, इसे समझ पाना कभी मुश्किल, तो कभी बहुत आसान है…. जैसे “पानी की बूँद”, कहने को तो सिर्फ एक मामूली बूँद होती [...]
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बूँद…
Posted in कन्हैया लाल, कविता on अगस्त 10, 2009 | 2 Comments »