बहुत ज़माने से “शमा और परवाने” की मोहब्बत का किस्सा मैंने सुना था…मगर हर किसी ने बस परवाने के दीवानेपन को लिखा है और हमने भी बस उसके मोहब्बत में फ़ना हो जाने के जज्बे को जाना ..पर एक दिन यूँ ही एक महफिल में शमा से जो कुछ गुफ्तगू हुई तो शमा के मर्म [...]
Archive for the ‘कविता’ Category
शमा और परवाने
Posted in कविता, रोहित अग्रवाल on September 30, 2009 | 3 Comments »
हिंदी भाषा महान है
Posted in कविता, रोहित अग्रवाल on September 14, 2009 | 4 Comments »
मिडसेम की मगाई ने ऐसा गिव अप कराया
हमने आज परीक्षा छोड़ कर हिंदी दिवस मनाया
प्रश्न-पत्र जैसे पर्येवेक्षक ने हमारी मेज पे धरा
हमने मोर्चा संभाला, ध्यान से एक एक प्रश्न पढ़ा
रात्रि जागरण कर जितना मगा था, सब याद किया
और इस प्रकार आधे घंटे का समय बर्बाद किया
फिर भी जब हमें दाल गलती नहीं दिखी
तो ख्याल आया की उम्मीद [...]
IIT की जिन्दगी
Posted in आलोक कुमार, कविता on September 8, 2009 | 7 Comments »
उस हसीना की यादों में पूरी रात जागा था ,और सुबह होते ही झटपट class भागा था ;lecture में बैठे-बैठे, मैं सोने लगा था,अपने आप पर नियंत्रण खोने लगा था ।मगर प्यारे prof ने,ये होने नहीं दियापलभर के लिए भी मुझे सोने नहीं दिया ;lecture से लौटकर बिस्तर पर सो गया,उसके हसीं सपनों में फ़िर [...]
सपनों का सवेरा
Posted in कविता, दीपशिखा वर्मा on September 6, 2009 | Leave a Comment »
इस दिव्य प्रभात की बेला में
इक नया सा सूरज आया है ,
जग मग किरणों के पथ से
इक नया सवेरा लाया है |
यु तो कई दिन आते हैं ,
पर जाने क्यों आज
आसमा का नीचे
इक नरम नरम सी छाया है,
इक गरम गरम सी छाया है|||
इक अलसाई करवट [...]
अनंत
Posted in ऋषभ जैन, कविता on August 17, 2009 | 2 Comments »
क्या है सघन मेघों के उस पार, नही जानता । हो सकता है अंधकार , या हो सकते हैं सूर्य हजार, यही मानता । सत्य छुपा हो उस चोटी पर, जो हो मेघों से भी ऊपर । बादल से छनती किरण थाम लूँ , उस चोटी को [...]
यादो का झोंका
Posted in कविता, पवन राय on August 12, 2009 | 3 Comments »
कही से आया हवा का झोंका
तेरी ही यादो से भर गया है
गुजर के कितने करीब से फिर
वो कल हमें दूर कर गया है
……………………….
वो खुशनुमा सा दर्द देता
निरीह मासूम प्यार अब भी
मेरे हृदय में लगे है जैसे
अभी कोई घाव कर गया है
……………………
रहू अभी चुप या पूछ लू मैं
घिरा हुआ हूँ मैं उलझनों से
जो दिन तेरे साथ [...]
बूँद…
Posted in कन्हैया लाल, कविता on August 10, 2009 | 2 Comments »
कुछ चीजें होती है, जिनका अनजाने में ही इंतज़ार किया करते है,
कोई खामोशी से तो कोई ख़ुशी से, अपना इज़हार किया करते है…
कुदरत की इस कृति की बड़ी अजीबोगरीब दास्ताँ है,
इसे समझ पाना कभी मुश्किल, तो कभी बहुत आसान है….
जैसे “पानी की बूँद”, कहने को तो सिर्फ एक मामूली बूँद होती है,
ये बहरूपिये की तरह [...]
कवि तो ख़ुद एक कविता है
Posted in ऋषभ जैन, कविता on August 6, 2009 | 1 Comment »
उसमें अनंत गहराई है,
है व्याकुलता, तन्हाई है,
ढूंढ सको तो ढूंढ लो ,
एक ‘सोता‘उसमें कहीं बहता है-
कवि तो ख़ुद एक कविता है ।
दुनिया से बेगाना है,
दुनियादारी से अनजाना है,
अव्यक्त, उलझे भावों को,
वो कागज़ पर लिख देता है-
कवि तो ख़ुद एक कविता है ।
शब्दों की भी सीमायें हैं,
कविता में कुछ अंश ही आयें हैं,
सागर से निकली इन [...]
मैं अपरिचित
Posted in कविता, बिरजू on August 1, 2009 | Leave a Comment »
आज होकर इस जहाँ से, जा रहा हूँ मैं अपरिचित,
जब जिया तब था अपरिचित , ख़ुद से और संसार से ।
जिस ज़मीं को जानता था , जिस धरम को मानता था ,
चाहता था मैं जिन्हें वो लोग भी अब हैं अपरिचित ।
अग्नि धरा आकाश से , वायु और जल की प्यास से ,
था बना कण [...]
आज कलम उठ जाने दो !!
Posted in कविता, बिरजू on August 1, 2009 | 2 Comments »
कई दिनों से सोये मन में
आज लहर बह जाने दो ,
गहन विचारों के मंथन में
आज कलम उठ जाने दो !!
मुझे साज़ का ज्ञान नही है
स्वर लहरों का भान नही है
किंतु म्रदंगी की थापों पर
आज कदम उठ जाने दो ,
गहन विचारों के मंथन में
आज कलम उठ जाने दो !!
अंतर्मन के कोलाहल में
सुलगालो एक चिंगारी
फ़िर उस चिंगारी [...]