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Archive for the ‘गौरव’ Category

हो जाऊँ कभी मैं तेज (बिजली) सा
सूरज की तेज किरण सा
घुमु मैं कहीं भी
हो घर मेरा मधुवन सा
राज करू जहां पर मैं
कहलाऊँ मैं भगवन सा
जो चाहू वो मिल जाए
वो … जाए वो जी जाए
झूमु कभी मैं सावन सा
कभी सोचता हूँ दोडू भागु
कस्तूरी के लिए जैसे
वन में कोई हिरन सा
कभी कहीं खो जाऊँ मैं
आसमा के तारो [...]

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हम आजाद होते तो
यह देश इक नगमा होता
संगीत झरने पशु पक्षी देते
गायक भारत जन होता
बारिश होती न कहीं बाढ़ आती
जब पानी भी आजाद होता
न घर इतने तबाह होते
न कोई घरौंदा बर्बाद होता
घर कोई टूटता भी तो
मदद सभी करते
न किसी की जाती जान
न कोई भूखा रहा होता
व्यवस्था भी इतनी होती
अगली सुबह स्वागत के लिए
नया घर तैयार [...]

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