हो जाऊँ कभी मैं तेज (बिजली) सा सूरज की तेज किरण सा घुमु मैं कहीं भी हो घर मेरा मधुवन सा राज करू जहां पर मैं कहलाऊँ मैं भगवन सा जो चाहू वो मिल जाए वो … जाए वो जी जाए झूमु कभी मैं सावन सा कभी सोचता हूँ दोडू भागु कस्तूरी के लिए जैसे [...]
Archive for the ‘गौरव’ Category
मेरा मन
Posted in कविता, गौरव on मार्च 27, 2008 | Leave a Comment »
आजाद
Posted in कविता, गौरव on मार्च 27, 2008 | Leave a Comment »
हम आजाद होते तो यह देश इक नगमा होता संगीत झरने पशु पक्षी देते गायक भारत जन होता बारिश होती न कहीं बाढ़ आती जब पानी भी आजाद होता न घर इतने तबाह होते न कोई घरौंदा बर्बाद होता घर कोई टूटता भी तो मदद सभी करते न किसी की जाती जान न कोई भूखा [...]