इस दिव्य प्रभात की बेला में
इक नया सा सूरज आया है ,
जग मग किरणों के पथ से
इक नया सवेरा लाया है |
यु तो कई दिन आते हैं ,
पर जाने क्यों आज
आसमा का नीचे
इक नरम नरम सी छाया है,
इक गरम गरम सी छाया है|||
इक अलसाई करवट [...]
Posted in कविता, दीपशिखा वर्मा on September 6, 2009 | Leave a Comment »
इस दिव्य प्रभात की बेला में
इक नया सा सूरज आया है ,
जग मग किरणों के पथ से
इक नया सवेरा लाया है |
यु तो कई दिन आते हैं ,
पर जाने क्यों आज
आसमा का नीचे
इक नरम नरम सी छाया है,
इक गरम गरम सी छाया है|||
इक अलसाई करवट [...]