सागर की अपनी विशिष्टता है वह अनंत है, अगाध है, अथाह है जिसमें होता असीम उर्जा का अविरत प्रवाह है . लेकिन मैं उस नन्ही छोटी लहर को जीवन के अधिक समीप पाता हूँ , वह नन्ही लहर ,जो दूर किसी छोर से जन्म पाती है और उसी पल से नन्हें संघर्ष की कथा शुरू [...]
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नन्हा संघर्ष
Posted in कविता, नीरज शारदा on अक्टूबर 4, 2007 | 5 Comments »