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Archive for the ‘पवन राय’ Category

कही से आया हवा का झोंका तेरी ही यादो से भर गया है गुजर के कितने करीब से फिर वो कल हमें दूर कर गया है ………………………. वो खुशनुमा सा दर्द देता निरीह मासूम प्यार अब भी मेरे हृदय में लगे है जैसे अभी कोई घाव कर गया है …………………… रहू अभी चुप या पूछ [...]

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हे मृगनयनी हे कमल बदन मै क्या दू  तुमको संबोधन अ़ब तुम ही मेरा जीवन हो तुझमे बसते है प्राण प्रिये प्रथम मिलन की वह वेला आँखों से क्या तुमने खेला तेरे नयनो के तीक्ष्ण बाण मैंने अपने दिल पे झेला छरहरा बदन मदमस्त चाल लगाती जैसे लचकती डाल तेरी सुंदर काया से मन चितवन [...]

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