कही से आया हवा का झोंका तेरी ही यादो से भर गया है गुजर के कितने करीब से फिर वो कल हमें दूर कर गया है ………………………. वो खुशनुमा सा दर्द देता निरीह मासूम प्यार अब भी मेरे हृदय में लगे है जैसे अभी कोई घाव कर गया है …………………… रहू अभी चुप या पूछ [...]
Archive for the ‘पवन राय’ Category
यादो का झोंका
Posted in कविता, पवन राय on अगस्त 12, 2009 | 3 Comments »
प्रेम पत्र ( दिल के भीतर की आवाज़ )
Posted in कविता, पवन राय on जुलाई 28, 2009 | 10 Comments »
हे मृगनयनी हे कमल बदन मै क्या दू तुमको संबोधन अ़ब तुम ही मेरा जीवन हो तुझमे बसते है प्राण प्रिये प्रथम मिलन की वह वेला आँखों से क्या तुमने खेला तेरे नयनो के तीक्ष्ण बाण मैंने अपने दिल पे झेला छरहरा बदन मदमस्त चाल लगाती जैसे लचकती डाल तेरी सुंदर काया से मन चितवन [...]