अपने अश्को से आज तेरा दामन भीगा दूँ
मुझको ऐ जान मेरी इतनी इजाज़त दे दो
ना जाने किन जमानो से मैं सोया नही हूँ
अपने आँचल में छिपा लो , मुझको सुला दो
मैं अपनी तक़दीर से लड़ता अकेला थक गया हूँ
साथ मेरे आ के मुझको अब सहारा दे दो
न जाने कितनी सादियो से मैं रोया नही हूँ
ये [...]
Archive for the ‘मनीष सौरभ’ Category
मुझको ऐ जान मेरी इतनी इजाजत दे दो
Posted in कविता, मनीष सौरभ on March 21, 2008 | Leave a Comment »
जिंदगी की राह-ए-गुजर में
Posted in कविता, मनीष सौरभ on October 4, 2007 | 1 Comment »
जिंदगी की राह-ए-गुजर में यार मेरा था पुराना
आईने ने भी कर दिया मुझसे अब तो ये बहाना
दिल दिया है जिसको उसे ये दर्द भी दे आइये
दौर-ए-जहाँ के ज़ख्म अब मुझको नहीं दिखलाइये
लाख कोशिश कर चुका, आईने को मैं भाता नहीं
बेरहम मेरा सनम है, आईना समझ पाता नहीं
आज जब रुखसत हुए हैं तो इतना तो कर [...]