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Archive for the ‘रश्मि चौधरी’ Category

आदत

सहेज कर रखी गयी , शेल्फ की किताबों पे पड़ी हुई गर्द जैसे . या, किसी मोड़ पे इंतज़ार में उखड़ते, मील के पत्थर  जैसे.आवाज़ को क़ैद करते नुक्तों की तरह किसी एक सोच से चिपक कर चुप से रह जाते हैं . “ठहरे हुए लोग” ***************

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