बहुत ज़माने से “शमा और परवाने” की मोहब्बत का किस्सा मैंने सुना था…मगर हर किसी ने बस परवाने के दीवानेपन को लिखा है और हमने भी बस उसके मोहब्बत में फ़ना हो जाने के जज्बे को जाना ..पर एक दिन यूँ ही एक महफिल में शमा से जो कुछ गुफ्तगू हुई तो शमा के मर्म [...]
Archive for the ‘रोहित अग्रवाल’ Category
शमा और परवाने
Posted in कविता, रोहित अग्रवाल on September 30, 2009 | 3 Comments »
हिंदी भाषा महान है
Posted in कविता, रोहित अग्रवाल on September 14, 2009 | 4 Comments »
मिडसेम की मगाई ने ऐसा गिव अप कराया
हमने आज परीक्षा छोड़ कर हिंदी दिवस मनाया
प्रश्न-पत्र जैसे पर्येवेक्षक ने हमारी मेज पे धरा
हमने मोर्चा संभाला, ध्यान से एक एक प्रश्न पढ़ा
रात्रि जागरण कर जितना मगा था, सब याद किया
और इस प्रकार आधे घंटे का समय बर्बाद किया
फिर भी जब हमें दाल गलती नहीं दिखी
तो ख्याल आया की उम्मीद [...]