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Archive for the ‘हर्षवर्धन’ Category

अमराई की छाँव सी सपनों के गाँव सा , जैसे हो सीप में मोती समंदर में नाव सा , कोई गीत गाना चाहता हूँ तुमको सुनाना चाहता हूँ , खुशबु हो जिसमें फैली सोंधी सी माटी की छाँव हो जिसपर पसरी अरहर की टाटी सी , ऐसे उपवन के जैसा गीत गाना चाहता हूँ , [...]

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