जंगल-गीत
Posted in कविता, हर्षवर्धन on October 4, 2007 | 7 Comments »
अमराई की छाँव सी
सपनों के गाँव सा ,
जैसे हो सीप में मोती
समंदर में नाव सा ,
कोई गीत गाना चाहता हूँ
तुमको सुनाना चाहता हूँ ,
[...]
Posted in कविता, हर्षवर्धन on October 4, 2007 | 7 Comments »
अमराई की छाँव सी
सपनों के गाँव सा ,
जैसे हो सीप में मोती
समंदर में नाव सा ,
कोई गीत गाना चाहता हूँ
तुमको सुनाना चाहता हूँ ,
[...]