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Archive for the ‘गरिमा तिवारी’ Category

इस दिल की भावना कोई ना समझ पाया
कि आते आते ये दर्द आँखों में भर आया
इस दर्द को पोंछने में भी एक टीसें सी उठी
बह जाने दो मुझे एक बार कहीं ये आवाज उठी
आज फिर उसे रोकने में हाथ कंपकंपाया है
इस दर्दनाक आवाज को फिर दिल की गहराईयों में दबाया है
कभी पुकारे वो आवाज दुबारा
गूँजेगा यही सवाल बार बार हमारा
सवाल ये है कि इस तरह कब तक बचेंगें इस दर्द से
दुनिया को छोड़ क्यूँ ना निकाल दें इस दर्द को मन से
और बह जाने दें इन्हें बनकर दरिया
दुनिया है ही तो भावनाएँ जताने का जरिया.

— गरिमा तिवारी

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