Feeds:
पोस्ट
टिप्पणियाँ

Archive for the ‘रविरंजन कुमार’ Category

अपने बीमार को ये कैसी सजा देते हैं ?
वो जब भी आते हैं, दर्द और बढा देते हैं !!

सुना है उसने छुपा रक्खी है बड़ी हुश्न की दौलत,
फ़कीर आये उनके दर पे, देखे तोः क्या देते हैं !!

बचेगा कैसे भला कोई उनकी निगाह-ए-नश्तर से,
संभलने भी  नहीं देते और तीर चला देते हैं !!

दर्द-आशनाई का क्या खूब ये मंजर देखा,
खुद जख्म लगाते हैं, औ खुद ही हवा देते हैं !!

दुनिया में कभी हमने ना जीने का सलीका सीखा,
फरेब खा-खा के हम उनको वफ़ा देते हैं !!

ए खुदा तू मेरे कातिल को सलामत रखना,
उठा के कब्र से हम जो हाथ दुआ देते हैं !!

Advertisements

Read Full Post »