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Archive for सितम्बर, 2008

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनायें !!

बंधुओं,
यह सर्वविदित हैं की बीते दिन मानवता को शर्मसार करने वाले कुकृत्य पुनः दुहराए गए….दिल्ली की गलियों में फिर किलकारियां गूंजी ,फिर कोई अनाथ हुआ ,फिर कोई दिल सुन्न हुआ होगा ..तो क्या यह सिलसिला चलता ही रहेगा …नहीं ये थमेगा और इसे रोकेंगे हम सब…बस एक ज्वाला की दरकार हैं …उसी ज्वाला की एक इकाई स्वरुप प्रस्तुत मेरी ये रचना…..

ओ प्रफुल्लित मनुवंशजों !!

निद्रा की गोद में
सुसुप्त जीवन तुम्हारा
क्यों नहीं बेधती
अपनों की ही करुण वेदना
तुम चेतनाहीन तो नहीं
फिर क्यों नहीं थमती
विचारों की तकरार

झंकृत करती मानवता
की सुशोभित दर्प को
वो मासूम पल
क्यों होते बदनाम

विनाश की फर्श पर
मुरझाता जीवन
जागो मेरे बांकुरों
कर दो पल समर्पित
दूसरों के खातिर

शुभ्रमयी दिवसों की चाह में
परम की जन्नत को
उतार ला ज़मीं पर
कह सके खुदा भी
बन्दे तू ही मानव हैं
विसरित जिसकी नभ में
कालजयी अखंड गाथा

एक शामियाना
निर्मित ऐसा कर
देवराज भी आ ठहरे
कुछ ऐसा कर
ओ मानवता के मीत
– भास्कर भारती

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